{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Ek Ajeeb Si Mushkil | Kunwar Narayan ","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/b811b2ac\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":175,"description":"एक अजीब-सी मुश्किल | कुँवर नारायण\n\nएक अजीब-सी मुश्किल में हूँ इन दिनों—\nमेरी भरपूर नफ़रत कर सकने की ताक़त\n\nदिनोंदिन क्षीण पड़ती जा रही\nअंग्रेज़ों से नफ़रत करना चाहता\n\nजिन्होंने दो सदी हम पर राज किया\nतो शेक्सपीयर आड़े आ जाते\n\nजिनके मुझ पर न जाने कितने एहसान हैं\nमुसलमानों से नफ़रत करने चलता\n\nतो सामने ग़ालिब आकर खड़े हो जाते\nअब आप ही बताइए किसी की कुछ चलती है\n\nउनके सामने?\nसिखों से नफ़रत करना चाहता\n\nतो गुरु नानक आँखों में छा जाते\nऔर सिर अपने आप झुक जाता\n\nऔर ये कंबन, त्यागराज, मुत्तुस्वामी...\nलाख समझाता अपने को\n\nकि वे मेरे नहीं\nदूर कहीं दक्षिण के हैं\n\nपर मन है कि मानता ही नहीं\nबिना उन्हें अपनाए\n\nऔर वह प्रेमिका\nजिससे मुझे पहला धोखा हुआ था\n\nमिल जाए तो उसका ख़ून कर दूँ!\nमिलती भी है, मगर\n\nकभी मित्र\nकभी माँ\n\nकभी बहन की तरह\nतो प्यार का घूँट पीकर रह जाता\n\nहर समय\nपागलों की तरह भटकता रहता\n\nकि कहीं कोई ऐसा मिल जाए\nजिससे भरपूर नफ़रत करके\n\nअपना जी हल्का कर लूँ\nपर होता है इसका ठीक उलटा\n\nकोई-न-कोई, कहीं-न-कहीं, कभी-न-कभी\nऐसा मिल जाता\n\nजिससे प्यार किए बिना रह ही नहीं पाता\nदिनोंदिन मेरा यह प्रेम-रोग बढ़ता ही जा रहा\n\nऔर इस वहम ने पक्की जड़ पकड़ ली है\nकि वह किसी दिन मुझे\n\nस्वर्ग दिखाकर ही रहेगा।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}