{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Main Raaste Bhoolta Hun | Chandrakant Devtale","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/b842788b\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":170,"description":"मैं रास्ते भूलता हूँ और इसीलिए नए रास्ते मिलते हैं | चंद्रकांत देवताले \n\nमैं रास्ते भूलता हूँ\nऔर इसीलिए नए रास्ते मिलते हैं\nमैं अपनी नींद से निकल कर प्रवेश करता हूँ\nकिसी और की नींद में\nइस तरह पुनर्जन्म होता रहता है\nएक जिंदगी में एक ही बार पैदा होना\nऔर एक ही बार मरना\nजिन लोगों को शोभा नहीं देता\nमैं उन्हीं में से एक हूँ\nफिर भी नक्शे पर जगहों को दिखाने की तरह ही होगा\nमेरा जिंदगी के बारे में कुछ कहना\nबहुत मुश्किल है बताना\nकि प्रेम कहाँ था किन-किन रंगों में\nऔर जहाँ नहीं था प्रेम उस वक्त वहाँ क्या था\nपानी, नींद और अँधेरे के भीतर इतनी छायाएँ हैं\nऔर आपस में प्राचीन दरख्तों की जड़ों की तरह\nइतनी गुत्थम-गुत्था\nकि एक दो को भी निकाल कर\nहवा में नहीं दिखा सकता\nजिस नदी में गोता लगाता हूँ\nबाहर निकलने तक\nया तो शहर बदल जाता है\nया नदी के पानी का रंग\nशाम कभी भी होने लगती है\nऔर उनमें से एक भी दिखाई नहीं देता\nजिनके कारण चमकता है\nअकेलेपन का पत्थर","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}