{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Tab Tum Kya Karoge? | Om Prakash Valmiki","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/b919f63f\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":265,"description":"तब तुम क्या करोगे? - ओमप्रकाश वाल्मीकि\n \nयदि तुम्हें, \nधकेलकर गाँव से बाहर कर दिया जाए \nपानी तक न लेने दिया जाए कुएँ से \nदुतकारा-फटकारा जाए \nचिलचिलाती दुपहर में \nकहा जाए तोड़ने को पत्थर \nकाम के बदले \nदिया जाए खाने को जूठन \nतब तुम क्या करोगे? \nयदि तुम्हें, \nमरे जानवर को खींचकर \nले जाने के लिए कहा जाए \nऔर, \nकहा जाए ढोने को \nपूरे परिवार का मैला \nपहनने को दी जाए उतरन \nतब तुम क्या करोगे? \nयदि तुम्हें, \nपुस्तकों से दूर रखा जाए \nजाने नहीं दिया जाए \nविद्या मंदिर की चौखट तक \nढिबरी की मंद रोशनी में \nकालिख पुती दीवारों पर \nईसा की तरह टाँग दिया जाए \nतब तुम क्या करोगे? \nयदि तुम्हें, \nरहने को दिया जाए \nफूस का कच्चा घर \nवक़्त-बेवक़्त फूँक कर जिसे \nस्वाह कर दिया जाए \nबरसात की रातों में \nघुटने-घुटने पानी में \nसोने को कहा जाए \nतब तुम क्या करोगे? \nयदि तुम्हें, \nनदी के तेज़ बहाव में \nउल्टा बहना पड़े \nदर्द का दरवाज़ा खोलकर \nभूख से जूझना पड़े \nभेजना पड़े नई-नवेली दुल्हन को \nपहली रात ठाकुर की हवेली \nतब तुम क्या करोगे? \nयदि तुम्हें, \nअपने ही देश में नकार दिया जाए \nमानकर बँधुआ \nछीन लिए जाएँ अधिकार सभी \nजला दी जाए समूची सभ्यता तुम्हारी \nनोच-नोच कर \nफेंक दिए जाएँ \nगौरवमय इतिहास के पृष्ठ तुम्हारे \nतब तुम क्या करोगे? \nयदि तुम्हें, \nवोट डालने से रोका जाए \nकर दिया जाए लहूलुहान \nपीट-पीटकर लोकतंत्र के नाम पर \nक़दम-क़दम पर \nयाद दिलाया जाए जाति का ओछापन \nदुर्गंध भरा हो जीवन \nहाथ में पड़ गए हों छाले \nफिर भी कहा जाए \nखोदो नदी-नाले \nतब तुम क्या करोगे? \nयदि तुम्हें, \nसरेआम बेइज़्ज़त किया जाए \nछीन ली जाए संपत्ति तुम्हारी \nधर्म के नाम पर \nकहा जाए बनने को देवदासी \nतुम्हारी स्त्रियों को \nकराई जाए उनसे वेश्यावृत्ति \nतब तुम क्या करोगे? \nसाफ़-सुथरा रंग तुम्हारा \nझुलसकर साँवला पड़ जाएगा \nखो जाएगा आँखों का सलोनापन \nतब तुम काग़ज़ पर \nनहीं लिख पाओगे \nसत्यम, शिवम्, सुंदरम्। \nदेवी-देवताओं के वंशज तुम \nहो जाओगे लूले-लंगड़े और अपाहिज \nजो जीना पड़ जाए युगों-युगों तक \nमेरी तरह, \nतब तुम क्या करोगे?","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}