{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Sankraman | Satyam Tiwari","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/c017e115\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":142,"description":"संक्रमण | सत्यम तिवारी रेखा के उस पार सब संदिग्ध थेइस तरह वह लंपट था और मुँहफटसूचियों से नदारदचौकसी से अंजानवह जिस देवता को फूल चढ़ाताउसकी कृपा चट्टानी पत्थरों के बरक्स ढुलकतीउसकी प्रार्थना अँधेरी काली सड़कों-सी अंतहीनजहाँ नीचे वाला ही ऊपर वाला होवहाँ फाँसी के फंदे परगिलोटिन के तख्ते परउन्मादियों के झंडे परवह किसके भरोसे चढ़ा?अगर उसे अपने ही गुनाहों की सजा मिलीतो उसका होना इतना भी बुरा नहीं होतावह जो समय रहते कालातीत हो गयाउसके लिए मैं ठीक इस जगह परएक पंक्ति भी नहीं सोच सकायह कितना गलत होताअगर उसके बारे में मैं गलत होतायह कितना गलत होताअगर इस बारे में मैं सही होताबात गुलमोहर और अनजान गलियों की नहीं हैहै तो यह जीवन और मृत्यु मेंश्रेष्ठताबोध की भी नहींलेकिन जब लोग कहते हैं कि उन्हें जीना पड़ातो लगता है कि मरने को मिला होता तो मर गए होते!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}