{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Churchgate Ka Platform | Anup Sethi","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/c2875fc3\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":144,"description":"चर्चगेट का प्लेट्फॉर्म | अनूप सेठी\n\nशाम के समय जब प्लेटफॉर्म बहुत व्यस्त होता है\nढलती धूप के चौकोर टुकड़े\nपैरों से खचाखच भरते जाते हैं\nरीत जाते हैं फिर भर जाते हैं\n\nदीवारों पर लगे बड़े पँखों की हवा में\nसाँस लेने पसीना सुखाने\nकिसी का इंतज़ार करने को\nरुक जाते हैं कई लोग\n\nदो-दो मिनट में लोगों का रेला आता है\nदनदनाता धकियाता\nछूता आसपास\nगुजर जाता है\n\nजैसे टयूब वैल का बंबा\nछूटता है रुक रुक कर\nकलकल करता सिहराता जज़्ब हो जाता है\nखेतों की मिट्टी के रग रेशे में\n\nबहुत सारे पैरों को\nप्लेटफॉर्म की रोशनी के हवाले कर\nधूप चली जाएगी मैरीन ड्राइव की तरफ़\nसमुद्र में उतर जाएगा सूरज\nनई दुनिया की टोह लेता\n\nदो-दो मिनट में लोगों का रेला\nदिन भर के काम से थका\nट्रेनों में ठुँस कर निकल जाएगा\nघरों की दूसरी दुनिया को\n\nट्यूब वेल के बंबे का छलछलाता पानी\nमिट्टी के रग रेशे में जान डालता है\nठंडी ताज़ी महक सी उठती है\nपसीने में रची हुई\n\nबड़े पँखों की हवा के नीचे\nबेहद व्यस्त प्लेटफॉर्म\nबहुत सारे शोर में\nउम्मीद की आहट देता है\nचर्चगेट बहुत सुन्दर दिखता है।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}