{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Geet | Sheoraj Singh 'Bechain'","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/c3c01ef7\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":190,"description":"गीत | डॉ श्योराज सिंह 'बेचैन' \n\nमज़दूर-किसानों के अधर यूँ ही कहेंगे।\nहम एक थे, हम एक हैं, हम एक रहेंगे।।\nमज़हब, धर्म  के नाम पर लड़ना नहीं हमें।\nफिर्को में जातियों में बिखरना नहीं हमें |।\nहम नेक थे, हम नेक हैं, हम नेक रहेंगे ।\nसमता की भूख हमसे कह रही है अब उठो।\nसामन्तों, दरिन्दों की बढ़ो, रीढ़ तोड़ दो ।।\nअपने हकूक दुश्मनों से लेके रहेंगे |\nकैसा अछूत-छूत क्या, हैं हिन्दू क्या मुसलमान ।\nयकरसाँ हैं ज़माने के रफीको! सभी इन्सान |।\nजो फर्क करेगा उसे जाहिल कहेंगे |\nफिकों से, जुबानों से तो ऊपर उठे हैं हम ।\nतूफान की रफ़्तार से आगे बढ़े हैं हम ।।\nमेहनत के हक के वास्ते लड़ते ही रहेंगे ।\nहमको तो शहीदों की शहादत पर नाज़ है।\nदलितों के खून में रँगा ये तख़्तो-ताज़ है।।\nइस मुल्क को महफूज़ हमेशा ही देखेंगे |\nसदियों से पी रहे हैं सितमगर लहू के जाम।\nमजलूम की तबाही बढ़ाता है यह निज़ाम |।\nसहने को बहुत सह लिया बस अब न सहेंगे |\nदुनिया में कमेरों ने चमत्कार किया है।\nनाकारों, निठल्लों ने सदा खून पिया है।।\nइस जोंक सी फितरत को उभरने नहीं देंगे |\nसमता, स्वतन्त्रता के नये गीत गाएँ हम |\nइंसानी भाईचारे के डंके बजाएँ हम |।\nमेहनतकशों जहान के मिल बैठ कहेंगे।\nहम एक थे, हम एक हैं, हम एक रहेंगे।।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}