{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Bada Beta | Kinshuk Gupta","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/caedd089\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":154,"description":"बड़ा बेटा | किंशुक गुप्तापिता हृदयाघात से ऐसे गएजैसे साबुन की घिसी हुई टिकियाहाथ से छिटक कर गिर जाती है नाली मेंया पत्थर लगने से अचानक चली जाती हैमोबाइल की रोशनीअचानक मैं बड़ा हो गयाअनिद्रा के शिकार मेरे पिता कोन बक्शी गई गद्दे की नर्माईया कंबल की गरमाईपटक दिया गया कमरे के बाहरजैसे बिल्ली के लिए कसोरे मेंछोड़ दिया जाता है दूधपूरी रात माँ की पुतलियों में शोक सेकहीं ज़्यादाठहरा रहा भविष्य का पिशाचउनकी छुअन में प्रेम नहींचाह थी एक सहारे कीजैसी लोहे के जंगलों से रखी जाती हैसुबह तक मुझे लगता रहाठंड से बिलबिलाते पिता की दहाड़ सेमैं फिर छोटा हो जाऊँगामैंने उनके तलवों को गुदगुदायादो-चार बार झटकार कर देखालेकिन पिता नहीं उठेफिर मैंने ज़बरदस्ती उनकी आँखें खोल दींऔर घबराकर अपने कमरे में दौड़ गयाजिन आँखों से मैंने दुनिया देखना सीखा थावो काली हो चुकी थीं","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}