{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Hanso Hanso Jaldi Hanso | Raghuvir Sahay","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/cbaa53de\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":172,"description":"हँसो हँसो जल्दी हँसो- रघुवीर सहाय\n \nहँसो तुम पर निगाह रखी जा रही है \nहँसो अपने पर न हँसना क्योंकि उसकी कड़वाहट \nपकड़ ली जाएगी और तुम मारे जाओगे \nऐसे हँसो कि बहुत ख़ुश न मालूम हो \nवरना शक होगा कि यह शख़्स शर्म में शामिल नहीं \nऔर मारे जाओगे \nहँसते-हँसते किसी को जानने मत दो किस पर हँसते हो \nसबको मानने दो कि तुम सबकी तरह परास्त होकर \nएक अपनापे की हँसी हँसते हो \nजैसे सब हँसते हैं बोलने के बजाय \nजितनी देर ऊँचा गोल गुंबद गूँजता रहे, उतनी देर \nतुम बोल सकते हो अपने से \nगूँज थमते-थमते फिर हँसना \nक्योंकि तुम चुप मिले तो प्रतिवाद के जुर्म में फँसे \nअंत में हँसे तो तुम पर सब हँसेंगे और तुम बच जाओगे \nहँसो पर चुटकुलों से बचो \nउनमें शब्द हैं \nकहीं उनमें अर्थ न हों जो किसी ने सौ साल पहले दिए हों \nबेहतर है कि जब कोई बात करो तब हँसो \nताकि किसी बात का कोई मतलब न रहे \nऔर ऐसे मौकों पर हँसो \nजो कि अनिवार्य हों \nजैसे ग़रीब पर किसी ताक़तवर की मार \nजहाँ कोई कुछ कर नहीं सकता \nउस ग़रीब के सिवाय \nऔर वह भी अक्सर हँसता है \nहँसा-हँसो जल्दी हँसो \nइसके पहले कि वह चले जाएँ \nउनसे हाथ मिलाते हुए \nनजरें नीची किए \nउसको याद दिलाते हुए हँसो \nकि तुम कल भी हँसे थे ","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}