{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Jeevan Nahi Mara Karta Hai | Gopaldas Neeraj","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/d11b18df\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":172,"description":"जीवन नहीं मारा करता है | गोपालदस नीरज \n \nछिप छिप अंश्रु बहाने वालों,\nमोती व्यर्थ लुटाने वालों\nकुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।\nसपना क्या है, नयन सेज पर\nसोया हुया आँख  का पानी\nऔर टूटना है उसको ज्यों\nजागे कच्ची नींद जवानी\nगीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालों\nकुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है।\nमाला बिखर गई तो क्या है,\nखुद ही हल हो गयी समस्या\nआंसू गर नीलाम हुये तो\nसमझो पूरी हुई तपस्या\nरूठे दिवस मनाने वालों, फटी कमीज़ सिलाने वालों\nकुछ दीपक के बुझ जाने से आंगन नहीं मरा करता है।\nखोता कुछ भी नहीं यहाँ पर\nकेवल जिल्द बदलती पोथी\nजैसे रात उतार चाँदनी\nपहने सुबह धूप की धोती\nवस्त्र बदलकर आने वालों, चाल बदलकर जाने वालों\nचंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।\nलाखों बार गगरिया फूटी\nशिकन नहीं आयी पनघट पर\nलाखों बार किश्तियाँ डूबीं\nचहल-पहल वो ही है तट पर\nतम की उमर बढ़ाने वालों लौ की आयु घटाने वालों\nलाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।\nलूट लिया माली ने उपवन\nलूटी न लेकिन गंध फूल की\nतूफानों तक ने छेड़ा पर\nखिड़की बन्द न हुई धूल की\nनफ़रत गले लगाने वालों, सब पर धूल उड़ाने वालों\nकुछ मुखड़ों की नाराज़ी से दर्पण नहीं मरा करता है।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}