{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Main Ud Jaunga | Rajesh Joshi","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/d71967c9\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":155,"description":"मैं उड़ जाऊँगा | राजेश जोशी सबको चकमा देकर एक रातमैं किसी स्वप्न की पीठ पर बैठकर उड़ जाऊँगाहैरत में डाल दूँगा सारी दुनिया कोसब पूछते बैठेंगेकैसे उड़ गया ?क्यों उड़ गया ?तंग आ गया हूँ मैं हर पल नष्ट हो जाने कीआशंका से भरी इस दुनिया सेऔर भी ढेर तमाम जगह हैं इस ब्रह्मांड मेंमैं किसी भी दुसरे ग्रह पर जाकर बस जाऊँगामैं तो कभी का उड़ गया होताचाय की गुमटियों और ढाबों में गरम होते तन्दूर परसिंकती रोटियों के लालच में मैं हिलगा रहा इतने दिनट्रक ड्राइवरों से बतियाते हुएमैदान में पड़ी खटियों परगुज़ार दीं मैंने इतनी रातेंक्या यह सुनने को बैठा रहूँ धरती परकि पालक मत खाओ ! मेथी मत खाओ !मत खाओ हरी सब्ज़ियाँ !मैं सारे स्वप्नों को गूँथ-गूँथकरएक खूब लम्बी नसैनी बनाऊँगाऔर सारे भले लोगों को ऊपर चढ़ाकरहटा लूँगा नसैनीऊपर किसी ग्रह पर बैठकरठेंगा दिखाऊँगा मैं सारे दुष्टों कोकर डालो कर डालो जैसे करना हो नष्टइस दुनिया कोमैं वहीं उगाऊँगा हरी सब्ज़ियाँ औरतन्दूर लगाऊँगादेखना एक रातमैं सचमुच उड़ जाऊँगा।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}