{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Vishwa Ki Vasundhara Suhagini Bani Rahe | Sheoraj Singh 'Bechain'","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/dd63ec58\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":143,"description":"विश्व की वसुंधरा सुहागिनी बनी रहे | श्यौराज सिंह ‘बेचैन\n\nगगन में सूर्य-चंद्र\nऔर चाँदनी बनी रहे\nचमन बना रहे\nचमन की स्वामिनी बनी रहे।\nकोयलों के\nकंठ की माधुरी बनी रहे।\nरागियों के–\nअधरों की रागिनी बनी रहे।\nगूँजते रहें\nभ्रमर किसलयों की चाह में,\nमेल-प्यार\nहो अपार, ज़िंदगी की राह में\nसब\nतरु सरस रहें, न पात टूट भू गहें।\nकली-कली–\nकी गोद, नित सुगंध से भरी रहे।\nये गिरी–\nशिखर बने रहें, ये सुरसुरी बनी रहे।\nभँवर को\nचीरती चली, प्रगति ‘तरी’ बनी रहे।\nछूतछात\nजातिभेद की प्रथा नहीं रहे।\nलोकतंत्र\nहो सजीव, मनुकथा नहीं रहे।\nगरज ये कि\nतृतीय विश्व युद्ध नहीं चाहिए। \nविश्व की–\nवसुंधरा सुहागिनी बनी रहे।\nहवा सुचैन\nशांति की सदा सुहावनी रहे।\nनहीं रहे तो\nदेश की दरिद्रता नहीं रहे।\nआदमी की आदमी से\nशत्रुता नहीं रहे।\nये भुखमरी नहीं रहे,\nये खुदकुशी नहीं रहे।\nदेवियों की\nदेह की तस्करी नहीं रहे।\nमनुष्यता\nकी भावना प्रबल घनी बनी रहे।\nचमन बना रहे\nचमन की स्वामिनी बनी रहे।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}