{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Choolha | Tanwir Sheikh 'Ilham'","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/de0bbb5b\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":183,"description":" चूल्हा । तनवीर शेख़ 'इल्हाम’ \n\nचूल्हे ने संभाला\nपितृसत्ता को\nऔर बनाएं रखा अपना वर्चस्व\nये चूल्हा\nस्त्रियों के ऊपर\nऐसे स्थापित किया गया\nजो पुरुषों के रौब को\nआजीवन कायम रख सके\nपितृसत्ता ने\nचूल्हे के सहारे से\nस्त्रियों के सत्य को, उनके सपने को \nऔर उनके व्यक्तित्व को\nहमेशा जलाए रखा\nकितनी ही स्त्रियों को ब्याहा गया\nसिर्फ चूल्हे में झोंकने को\nमानो ये चूल्हा\nपकवान बनाने के लिए\nआविष्कार नहीं बल्कि\nपुरुषों के अधिकार को\nउनके वर्चस्व को\nस्थायित्व बनाए रखने के लिए\nकिया गया हो\nइस चूल्हे ने\nन जाने कितने स्वप्न\nतिलांजित किए होंगे\nताकि पुरुष की\nपौरुष शक्ति कायम रहे\nसुनो लड़कियों\nअब वक्त हैं\nउस चूल्हे को\nलांघने का और\nउस चूल्हे को उसी में\nतिलांजित करने का\nताकि चूल्ह से चांद का\nसफ़र करो तुम\nतो अब हुंकार भरो\nछोड़ो हाथों से बेलन और\nथामों कलम-किताब जो\nतुम्हारे लिए साबित हो इंकलाब\nताकि\nतुम पा सको उस गगन को\nजो तुम्हारे उड़ान को तत्पर है और\nउस समाज पर काबिज़ हो जाओ\nजो तुम्हारे छलांग से भयभीत है\nजो तुम्हारे आगाज़ से भयभीत हैं.!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}