{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Marghat | Raghivir Sahay","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/df6b6c09\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":249,"description":"मरघट | रघुवीर सहाय\n\nशानदार मौत थी\n\nइसलिए कि कोई न भीड़ थी\nन था रोना-धोना\n\nहम लोग एक बड़े ख़ाली खेत में गए\nगाँव के सिमटने से बचा रह गया था जो\n\nऔर एक हल्की-सी देह को फेंक आए\n“कहाँ है मरघट?” जो पता दिया गया था\n\nपूछता उसे चला रामजस स्कूल के पीछे\nएक जगह दो लड़के बोले, “हाँ, रामजस?\n\nवहीं हम पढ़ते हैं—मरघट वहीं पर है?”\n—मुँह बाकर रह गया वह युवक—\n\nयह तो पता ही न था!\nफिर हम भटक गए\n\nअंत में एक किसी से मिले\nदोनों ने सुखमय आश्चर्य से पूछा—\n\n''मरघट? मरघट? मैं वहीं जा रहा हूँ, चलिए''\nयों रस्ता मिल गया।\n\nदाह-संस्कार में बड़ी कार्रवाई थी\nयह लाओ, वह लाओ, यहाँ धरो, वहाँ धरो,\n\nसात मन लकड़ी, पुरानी, सूखी भारी\nडब्बा-भर एक वही दारा सिंह वाला घी\n\nतीन हवन सामग्री के पाकिट, बस ख़त्म।\nजब चिता चुन गई नियम के अनुसार\n\nसंपुजन सुंदर था, शिल्प में रीतिमत\nशव उससे ढक गया\n\nतब मुखाग्नि दी गई तालियाँ बजी नहीं, कैमरे नहीं खड़के।\nनीरव विनम्रता : सब जानते थे कि क्या कर्मकांड है\n\nपर किसी पर कोई बंधन नहीं था सिवाय मौन रहने के\nवह थी तिहत्तर की\n\nऐसे ही हम भी थे\nउस उम्र के जहाँ हर पुरुष समवयस्क लगता है—\n\n“यह यहाँ वालों का 'लोकप्रिय' मरघट है''\nकोई हिंदी बोला\n\nश्री तनखा ने कहा, “हम जहाँ रहते हैं ज़्यादातर लोग मियाँ-बीवी हैं,''\nउम्र हो चली है, पूरी अवकाशप्राप्त लोगों की बस्ती है—\n\nआज यह, कल वह, छह बरस में मैं इस मरघट में बीस बार आया हूँ।\nइस तरह हमने उस बस्ती के इस निर्जन द्वीप का भूगोल पहचाना।\n\nलौटकर नहाया, हल्का हुआ,\nमानो बड़ा काम कर आया हूँ :\n\nदेह में फुर्ती, दिमाग़ में रोशनी—\nयह क्या एक मौत का करिश्मा है।\n\nमेरे स्वास्थ्य में सुधार?\nकमला ने कहा, नहीं तुम पैदल चले थे,\n\nभीतर से विह्वल हुए थे, उदास भी,\nठंड हो चली थी तब लाल-लाल लपटों को तापा था,\n\nकुछ भारी लकड़ियाँ उठाई थीं\nदस लोगों के साथ अनायास नम्र हो अपने जीवन की\n\nनिस्सारता जानी थी\nतभी लग रहा है कि रक्तचाप ठीक है।”","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}