{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Dharm hai | Gopaldas Neeraj","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/e1e67be4\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":184,"description":"धर्म है - गोपालदास \"नीरज\"\nजिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना,\nउन मुश्किलों में मुस्कुराना धर्म है।\nजिस वक़्त जीना गैर मुमकिन सा लगे,\nउस वक़्त जीना फर्ज है इंसान का,\nलाजिम लहर के साथ है तब खेलना,\nजब हो समुन्द्र पे नशा तूफ़ान का\nजिस वायु का दीपक बुझना ध्येय हो\nउस वायु में दीपक जलाना धर्म है।\nहो नहीं मंजिल कहीं जिस राह की\nउस राह चलना चाहिए इंसान को\nजिस दर्द से सारी उम्र रोते कटे\nवह दर्द पाना है जरूरी प्यार को\nजिस चाह का हस्ती मिटाना नाम है\nउस चाह पर हस्ती मिटाना धर्म है।\nआदत पड़ी हो भूल जाने की जिसे\nहर दम उसी का नाम हो हर सांस पर\nउसकी खबर में ही सफ़र सारा कटे\nजो हर नजर से हर तरह हो बेखबर\nजिस आँख का आखें चुराना काम हो\nउस आँख से आखें मिलाना धर्म है।\nजब हाथ से टूटे न अपनी हथकड़ी\nतब मांग लो ताकत स्वयम जंजीर से\nजिस दम न थमती हो नयन सावन झड़ी\nउस दम हंसी ले लो किसी तस्वीर से\nजब गीत गाना गुनगुनाना जुर्म हो\nतब गीत गाना गुनगुनाना धर्म है।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}