{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Aagman | Dinesh Kumar Shukla","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/e9771ff8\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":241,"description":"आगमन / दिनेश कुमार शुक्ल \n\nजंगी बेड़ों पर नहीं\nन तो दर्रा-खैबर से\nआयेंगे इस बार तुम्हारे भीतर से वे\n\nधन-धरती ही नहीं\nतुम्हारा मर्म, तुम्हारे सपने भी वे छीनेंगे इस बार,\nवे तुम सबके रक्त पसीने और आँसुओं\nका बदलेंगे रंग\nतुम्हारी दृष्टि तुम्हारा स्वाद\nतुम्हारी खाल\nतुम्हारी चाल-ढाल का भी बदलेगे ढंग,\nबीजों के अंकुरण\nऔर जीवों के गर्भाधान\nनियंत्रित होंगे उनके कानूनों से\n\nतुम्हें पता ही नहीं\nतुम्हारी कविता में वे\nपहले से ही घोल चुके हैं\nअपने छल के छन्द\nतुम्हारी भाषाओं के अंक मिथक किस्से मुहावरे\nसिर्फ अजायबघर में अब पाये जायेंगे\n\nदेशों की सीमाओं का उनकी सेनायें\nखुलेआम इस बार अतिक्रमण नहीं करेंगी\nवे तो सिर्फ इरेज़र से ही \nमिटा रहे हैं देश-देश की सीमा रेखा\n\nसात द्वीप-नवखण्ड और सातों समुद्र में\nसिर्फ पण्य की सार्वभौम सत्ता का सिक्का\nचला करेगा\nइस एकीकृत विश्वग्राम के मत्स्य-न्याय में\nएक साथ सब जीव जलेंगे दावानल में\n\nजिंसों की इलहाम भरी \nनई खेप अवतरित हुई है\nएक-भाव रस एक-एक भाषा में सारे\nबन्दीजन गुणगान कर रहे हैं उसका ही\n\nनये ब्रान्ड का प्रेम उतारा था बाज़ार में\nजिसने पहले\nलान्च किये हैं उसी कम्पनी ने\nहत्या के नये उपकरण,\nदाल-भात लिट्टी-चोखे की यादें आई हैं बाज़ार में\nसोहर चैता कजरी की\nस्वर लहरी के पाउच बिकते हैं\n\nविश्व शान्ति के सन्नाटे में\nसोनल चिड़िया अभी कहीं फड़फड़ा रही है आसमान में\nनई रोशनी की गर्मी में\nउसके पंख जले जाते हैं। ","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}