{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Samooh Gaan | Dr Sheoraj Singh 'Bechain'","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/f0ac5369\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":188,"description":"समूह गान | डॉ. श्यौराज सिंह 'बेचैन' \n\nनौजवां नया ‘जहाँ’ बनाएँगे।\nनौजवां नया ‘जहाँ’ बनाएँगे।\nखुशहाली हर किसी को हो–\nउजाली हर किसी को हो।\nजो आसमान की रही–\nवो रोशनी ज़मीं की हो।\nहमीं ‘शमाँ’ जलाएँगे-जलाएँगे।\nनौजवां नया ‘जहाँ’ बनाएँगे।\nनौजवां नया ’जहाँ’ बनाएँगे।\nजात-पात की तनाव \nऊँच-नीच, भेदभाव\nपेट के सवाल का\nजो दे नहीं सके जवाब\nऐसी रहनुमाई अब न चाहेंगे। \nनौजवां नया ‘जहाँ’ बनाएँगे।\nये जो सांप्रदायिकता की आग है–\nभाल पर दरिद्रता का दाग है।\nजिसके खून ने वसंत ला दिया–\nज़िंदगी उसे ‘ख़िज़ाँ’ का बाग़ है\n‘यूँ’ कैसे बागवाओं को सराहेंगे।\nनौजवां नया ‘जहाँ’ बनाएँगे।\nमर्द-औरतों में फ़र्क है अभी \nज़मीं पे बेबसी का नर्क है अभी \nदहेज़ कोढ़ है अभी समाज में \nबराबरी कहाँ है इस निज़ाम में \nकदम हमारे पर न लड़खड़ाएँगे।\nनौजवां नया ‘जहाँ’ बनाएँगे।\nजिनके वास्ते, शहादतें हुईं \nवे सच्चाइयाँ कहावतें हुईं \nजब भी हो गयी सितम की इन्तहाँ,\nजानते हैं सब बगावतें हुईं \nहम भी मिलके मुक्ति-गीत गाएँगे\nनौजवां नया ‘जहाँ’ बनाएँगे।\nपी गए आँसुओं के साथ रात।\nकह नहीं सके थे, दिल की बात रात, \nहम सुबह के वास्ते ही आए हैं \nहम सुबह ज़रूर लेके आएँगे\nनौजवां नया ‘जहाँ’ बनाएँगे।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}