{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Zameen Ko Jaadu Aata Hai! | Gulzar","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/f3cb5ea0\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":192,"description":"ज़मीं को जादू आता है! | गुलज़ार ये मेरे बाग की मिट्टी में कुछ तो हैये जादुई ज़मीं है क्या?ज़मीं को जादू आता है!अगर अमरूद बीजूँ मैं, तो ये अमरूद देती हैअगर जामुन की गुठली डालूँ तो जामुन भी देती हैकरेला तो करेला.....निम्बू तो निम्बू!अगर मैं फूल माँगू तो गुलाबी फूल देती हैमैं जो रंग दूँ उसे, वो रंग देती हैये सारे रंग क्या उसने कहीं नीचे छुपा रक्खे हैं मिट्टी मेंबहुत खोदा मगर कुछ भी नहीं निकला.....!ज़मीं को जादू आता है!ज़मीं को जादू आता हैबड़े करतब दिखाती हैये लम्बे-लम्बे ऊँचे ताड़ के जब पेड़, उँगली पर उठाती है!तो गिरने भी नहीं देती!हवाएँ खूब हिलाती हैं, ज़मीं हिलने नहीं देती!मेरे हाथों से शर्बत, दूध, पानीकुछ गिरे सब डीक जाती हैये कितना पानी पीती है!गटक जाती है जितना दो,इसे लोटे से दो या बाल्टी से,या नल दिन भर खुला रख दोगज़ब है, पेट भरता ही नहीं इस कासुना है ये नदी को भी छुपा लेती है अन्दर!ज़मीं को जादू आता है!ज़मी के नीचे क्या ‘चीनी’ की खानें हैं?खटाई की चट्टानें हैं?फलों में मीठा कैसे डालती है ये ज़मीं?लाती कहाँ से है?अनारों, बेरों और आमों में, सेबों में,सभी मीठों में भी मीठे अलग हैं,की पत्ते खाओ तो फीके हैं और फल मीठे लगते हैंमौसम्मी मीठी है तो नींबू खट्टा है!यकीनन जादू आता है!!वगरना बांस फीका, सख्त और गन्नों में रस क्यों है?ज़मीं के पेट में क्या कोई मकनातीस का टुकड़ा रखा है,कि जो गिरता है, उसके पास जाता हैवो चिड़िया हो या ‘उल्का’ हो!ज़मीं को जादू आता है!!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}