{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Bhaap | Shahanshah Alam","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/f7959f1c\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":247,"description":"भाप | शहंशाह आलम\n\nसमुद्र की भाप होकर गया पानी\nवापस लौट आता है\nया जो रेत की भाप गई\nलौट आई बारिश बनकर\nशब्द की भाप गई\nवह भी दिमाग़ को भेदती लौट आई\nपछतावे की भाप गई\nफिर जूते के तल्ले के आगे दबी आकर\nभाप बनकर गया लड़की का ख़्वाब\nअब नहीं लौटता चाहकर\nदबे पाँव ख़्वाब जैसे लौट आता था\nघोड़ी पर सवार लड़का बनकर\nअसर कम हो गया है माँ की दुआओं का\nतभी हत्यारा अपनी भीड़ में पाकर मार डालता है\nआग की भाप के बीच राँगे का लेप चढ़ाते क़लईगर को\nभीड़ किसी तफ़तीश से पहले\nसारे सबूत मिटा चुकी होती है\nकई बार मैं जीना चाहता था जिस तरह पेड़ जीते हैं\nऑक्सीजन की भाप पूरी पृथ्वी पर फैलाते हुए मगर\nजीने कहाँ दिया जाता है बूँदाबाँदी के बीच गाना गाते\nभाप तक कहाँ थी औरत की देह पर एक जोड़ी के सिवा\nजिसको नोचा-खसोटा गया अपनी मिल्कियत समझकर\nक्या चाँद पर भी पानी\nपत्थर से टकराकर भाप बनाता होगा\nजैसे बना लेते हैं प्रेमी जोड़े\nएक-दूसरे की साँसों से भाप\nजहाँ पर युद्ध होता होगा लंबा\nवहाँ पर शर्तिया भाप बनती होगी\nटैंक से छोड़े गए गोला-बारूद की\nगोला-बारूद से निकली हुई भाप\nबर्बर होती होगी मेरे राजा की तरह\nयह सच है एकदम सच है\nजैसे कि भाप का बनना सच है\nइन दरियाओं के बीच।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}