{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Khudaon Se Keh Do | Kishwar Naheed","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/fe3b9d3d\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":132,"description":"ख़ुदाओं से कह दो | किश्वर नाहीद जिस दिन मुझे मौत आएउस दिन बारिश की वो झड़ी लगेजिसे थमना न आता हो,लोग बारिश और आँसुओं मेंतमीज़ न कर सकेंजिस दिन मुझे मौत आएइतने फूल ज़मीन पर खिलेंकि किसी और चीज़ पर नज़र न ठहर सके,चराग़ों की लवें दिए छोड़करमेरे साथ-साथ चलेंबातें करती हुईमुस्कुराती हुईजिस दिन मुझे मौत आएउस दिन सारे घोंसलों मेंसारे परिंदों के बच्चों के पर निकल आएँ,सारी सरगोशियाँ जल-तरंग लगेंऔर सारी सिसकियाँ नुक़रई ज़मज़मे बन जाएँजिस दिन मुझे मौत आएमौत मेरी इक शर्त मानकर आएपहले जीते-जी मुझसे मुलाक़ात करेमेरे घर-आँगन में मेरे साथ खेलेजीने का मतलब जानेफिर अपनी मनमानी करेजिस दिन मुझे मौत आएउस दिन सूरज ग़ुरूब होना भूल जाएकि रौशनी को मेरे साथ दफ़्न नहीं होना चाहिए!                                                                                                                      अर्थ :सरगोशियाँ- चुपके चुपके बातें करना, कानाफूसी नुक़रई- चाँदी-जैसा उज्ज्वल, वो चीज़ जो चाँदी से बनी होज़मज़मे- स्पंदनग़ुरूब- सूरज का डूबना","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}