कोई ला के मुझे दे - दामोदर अग्रवाल कुछ रंग भरे फूल कुछ खट्टे-मीठे फल, थोड़ी बाँसुरी की धुन थोड़ा जमुना का जल कोई ला के मुझे दे! एक सोना जड़ा दिन एक रूपों भरी रात, एक फूलों भरा गीत एक गीतों भरी बात- कोई ला के मुझे दे! एक छाता छाँव का एक धूप की घड़ी, एक बादलों का कोट एक दूब की छड़ी- कोई ला के मुझे दे! एक छुट्टी वाला दिन एक अच्छी-सी किताब, एक मीठा-सा सवाल एक नन्हा-सा जवाब- कोई ला के मुझे दे!