Pratidin Ek Kavita

अच्छे बच्चे | नरेश सक्सेना 

कुछ बच्चे बहुत अच्छे होते हैं 
वे गेंद और ग़ुब्बारे नहीं माँगते 
मिठाई नहीं माँगते ज़िद नहीं करते 
और मचलते तो हैं ही नहीं 

बड़ों का कहना मानते हैं 
वे छोटों का भी कहना मानते हैं 
इतने अच्छे होते हैं 

इतने अच्छे बच्चों की तलाश में रहते हैं हम 
और मिलते ही 
उन्हें ले आते हैं घर 
अक्सर 
तीस रुपए महीने और खाने पर। 


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।