बड़ी-बी। अनिरुद्ध उमट बड़ी-बी दरवाज़ा खोलो तुम्हारी पान घुँघरू, ख़त लाने में हुई मुझसे देरी बहुत 'हम नहीं जानते तुम कौन हो' बड़ी-बी हाथ में ख़त लिए मुँह में पान चबाए छमछम करती दरवाज़े की दहलीज़ पर आ हैरान थी 'हमने अपने मरने का दिन तय कर रखा था हमने समझा वह आ गया है' कहती बड़ी-बी मेरी आँखों में झाँक रही थी 'ठीक है गड्ढा ठीक ही खुदा है' कहती वह उतरी और एक मुट्ठी मिट्टी हमें दे गई