Pratidin Ek Kavita

 उनका डर - गोरख पांडेय

वे डरते हैं 
किस चीज़ से डरते हैं वे 
तमाम धन-दौलत 
गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद? 
वे डरते हैं 
कि एक दिन 
निहत्थे और ग़रीब लोग 
उनसे डरना बंद कर देंगे।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।