भाषा । विवेक निराला मेरी पीठ पर टिकी एक नन्ही-सी लड़की मेरी गर्दन में अपने हाथ डाले हुए जितना सीख कर आती है उतना मुझे सिखाती है उतने में ही अपना सब कुछ दे जाती है।