Pratidin Ek Kavita

कवि - रमेश चंद्र शाह 

वह रंकों का रंक मगर राजा होता है।
सन्नाटे का शोर नहीं, बाजा होता है
कवि का मन यह नहीं महज़ तुक
कवि का मन साझा होता है।
इसीलिए, इसीलिए हाँ, इसीलिए तो
इतना सारा कीच पचा कर भी दुनिया का
कवि का मन किस क़दर अरे ताला होता है।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।