Pratidin Ek Kavita

कल्पना - हेमंत देवलेकर

उसने काग़ज़ पर 
एक चौकुट्टा सा 
गोला बनाया 
और मन में कहा 
‘चिड़िया’। 
फिर उसने उस गोले में 
कहीं एक बिंदी मांड दी 
और मन में कहा 
‘आसमान’। 
सच, 
चिड़िया की आँखों में 
आसमान 
बिंदु भर ही तो होगा

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।