Pratidin Ek Kavita

क्यों न - ज्ञानेन्द्रपति

क्यों न कुछ निराला लिखें
एक नई देवमाला लिखें
अँधेरे का राज चौतरफ
एक तीली उजाला लिखें
सच का मुँह चूम कर
झूठ का मुँह काला लिखें
कला भूल, कविता कराला लिखें
न आला लिखें, निराला लिखें
अमृत की जगह विष-प्याला लिखें
एक नई देवमाला लिखें
खल पोतें दुनिया पर एक ही रंग
हम बैनीआहपीनाला लिखें।
सारे इंद्रधनुष के रंगों में
सारे आयामों के बारे में लिखें। 
 

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।