सर्दी आई | सफ़दर हाश्मी सर्दी आई, सर्दी आई ठंड की पहने वर्दी आई। सबने लादे ढेर से कपड़े चाहे दुबले, चाहते तगड़े। नाक सभी की लाल हो गई सुकड़ी सबकी चाल हो गई। ठिठुर रहे हैं, काँप रहे हैं दौड़ रहे हैं, हाँप रहे हैं। धूप में दौड़ें तो भी सर्दी छाओं में बैठें तो भी सर्दी। बिस्तर के अंदर भी सर्दी बिस्तर के बाहर भी सर्दी। बाहर सर्दी, घर में सर्दी। पैर में सर्दी, सर में सर्दी। इतनी सर्दी किसने करदी अंडे की जम जाए ज़र्दी सारे बदन में ठिठुरन भरदी जाड़ा है मौसम बेदर्दी।