Pratidin Ek Kavita

पिंजरे | समृद्धि मनचंदा

ओ पगली लड़की! 
तुम पिंजरे की नहीं 
जंगलों की हो 
स्थिरता नहीं उत्पात चुनो 
अपनी माँओं को जन्म दो 
बेटियों को रीढ़ 
कोई पर्यावरणविद् कभी नहीं बताएगा 
कि एक ज़िद्दी लड़की 
दुनिया का सबसे लुप्तप्राय जीव है।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।