तुम्हारी आँखें।पराग पावन कितनी सुंदर हैं तुम्हारी आँखें मुझे कुछ और चाहिए जो कहा न गया हो आँखों के बारे में इतनी सुंदर आँखों से कितनी सुंदर दुनिया दिखती होगी और तुम्हारा काजल ओह जैसे पानी पर पानी बरसता है अपनी ही उछाल को उत्सव में बदलते हुए