हम हैं ताना, हम हैं बाना | उदय प्रकाश हम हैं ताना, हम हैं बाना। हमीं चदरिया, हमीं जुलाहा, हमीं गजी, हम थाना॥ हम हैं ताना''॥ नाद हमीं, अनुनाद हमीं, निःशब्द हमीं गंभीरा, अंधकार हम, चाँद-सूरज हम, हम कान्हा, हम मीरा। हमीं अकेले, हमीं दु्केले, हम चुग्गा, हम दाना॥ हम हैं ताना'''॥ मंदिर-महजिद, हम. गुरुद्वारा, हम मठ, हम बैरागी हमीं पुजारी, हमीं देवता, हम कीर्तन, हम रागी। आखत-रोली, अलख-भभूती, रूप धरें हम नाना॥ हम हैं ताना''॥ मूल-फूल हम, रुत बादल हम, हम माटी, हम पानी हमीं जहूदी-शेख-बरहमन, हरिजन हम खिस्तानी। पीर-अघोरी, सिद्ध-औलिया, हमीं पेट, हम खाना॥ हम हैं ताना॥ नाम-पता, ना ठौर-ठिकाना, जात-धरम ना कोई मुलक-खलक, राजा-परजा हम, हम बेलन, हम लोई। हमही दुलहा, हमीं बराती, हम फूँका, हम छाना॥ हम हैं ताना''॥