जन्मदिन । बेबी शॉ तुम्हें सोचते हुए रोज़ एक नई दुनिया रचती हूँ मिट्टी के चावल धूल की सब्ज़ी पत्ते की रोटी खेल-घर जैसी... एक ऐसी दुनिया जिसे कोई नहीं जानता जहाँ प्रकाश-लोभ से स्वयं को जलाती हूँ मैं...