दिल में हर दम चुभने वाला । माधव कौशिक दिल में हर दम चुभने वाला काँटा सही सलामत दे आँखें दे या मत दे लेकिन सपना सही सलामत दे हमें तो युद्ध आतंक भूख से मारी धरती बख़्शी है आने वाली पीढ़ी को तो दुनिया सही सलामत दे दावा है मैं इक दिन उस को दरिया कर के छोड़ूँगा खुली हथेली पर आँसू का क़तरा सही सलामत दे बच्चे भी अब खेल रहे हैं ख़तरनाक हथियारों से बचपन की बग़िया को कोई गुड़िया सही सलामत दे आधी और अधूरी हसरत कब तक ज़िंदा रक्खेंगे काग़ज़ पर ही दे लेकिन घर का नक़्शा सही सलामत दे भीड़ भरी महफ़िल में सबकी अलग अलग पहचान तो हो इसीलिए हर एक इंसान को चेहरा सही सलामत दे दिल में हर दम चुभने वाला काँटा सही सलामत दे आँखें दे या मत दे लेकिन सपना सही सलामत दे