मुझे तुम मिले! | फणीश्वरनाथ रेणु मुझे तुम मिले! मृतक-प्राण में शक्ति-संचार कर; निरंतर रहे पूज्य, चैतन्य भर! पराधीनता-पाप-पंकिल धुले! मुझे तुम मिले! रहा सूर्य स्वातंत्र्य का हो उदय! हुआ कर्मपथ पूर्ण आलोकमय! युगों के घुले आज बंधन खुले! मुझे तुम मिले!