भाषा | स्नेहमयी चौधरी यह नहीं कि उसे कोई शिकायत नहीं, लेकिन अब वह अपने पक्ष में कोई तर्क न देगी, न चाहेगी— लगाए गए आरोपों का कोई निराकरण। यह नहीं कि उसके पास कहने को कुछ नहीं, शायद यह कि बहुत कुछ है। अब कोई न पूछे उसके निजी दस्तावेज़, यही तो उसकी संपत्ति है। यद्यपि निष्क्रिय विद्रोह आज की भाषा नहीं : यह नहीं कि वह जानती नहीं। शायद यही उसके लिए सही भाषा की तलाश का एक तरीक़ा है।