Pratidin Ek Kavita

प्रेमपत्र - बद्री नारायण
 
प्रेत आएगा 
किताब से निकाल ले जाएगा प्रेमपत्र 
गिद्ध उसे पहाड़ पर नोच-नोच खाएगा 
चोर आएगा तो प्रेमपत्र चुराएगा 
जुआरी प्रेमपत्र पर ही दाँव लगाएगा 
ऋषि आएँगे तो दान में माँगेंगे प्रेमपत्र 
बारिश आएगी तो 
प्रेमपत्र ही गलाएगी 
आग आएगी तो जलाएगी प्रेमपत्र 
बंदिशें प्रेमपत्र पर ही लगाई जाएँगी 
साँप आएगा तो डँसेगा प्रेमपत्र 
झींगुर आएँगे तो चाटेंगे प्रेमपत्र 
कीड़े प्रेमपत्र ही काटेंगे 
प्रलय के दिनों में 
सप्तर्षि, मछली और मनु 
सब वेद बचाएँगे 
कोई नहीं बचाएगा प्रेमपत्र 
कोई रोम बचाएगा 
कोई मदीना 
कोई चाँदी बचाएगा, कोई सोना 
मैं निपट अकेला 
कैसे बचाऊँगा तुम्हारा प्रेमपत्र। 

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।