Pratidin Ek Kavita

ऐसी भाषा | भगवत रावत | आरती जैन

सारी उम्र बच्चों को पढ़ाई भाषा 
और विदा करते समय उनके
पास में नहीं था एक ऐसा शब्द 
जिसे देकर कह सकता कि लो 
इसे सँभाल कर रखना 
यह संकट के समय काम आएगा 
या कि वह तुम्हें शर्मिंदगी से बचाएगा 
या कि वह तुम्हें गिरने से रोकेगा 
या कि ज़रूरत पड़ने पर यह तुम्हें टोकेगा 
या कि तुम इसके सहारे किसी भी नीचता का सामना कर सकोगे 
या इतना ही कि कभी-कभी तुम इससे अपना ख़ालीपन भर सकोगे 
या कि यह शब्द ज़मीन की मिट्टी का टुकड़ा है 
या कि यह शब्द दो जून की रोटी से बड़ा है 
कुछ भी नहीं था मेरे पास 
कुछ भी नहीं है-यह तक कह सकने की 
भाषा न थी। 

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।