Pratidin Ek Kavita

कुछ भी तो नहीं / नंदकिशोर आचार्य 
 
कुछ भी तो नहीं ठीक से हुआ,
न बचपना, न समझदारी, 
न दोस्ती, न दुश्मनी, 
न प्रेम, न परिवार, 
न तंदुरुस्ती, न बीमारी, 
न हँसना, न रोना, 
न नींद, न जागना, 
न रेंगना, न तन कर खड़े रह पाना, 
कविता भी नहीं!
न कॉमेडी हुआ, न त्रासदी ठीक से जीवन
इसलिए डरता हूँ ठीक से मरूँगा तो न!’

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।