Pratidin Ek Kavita

रोशनी, पानी, पेड़ | अतुलवीर अरोड़ा

पानी में झाँकता है
एक पूरा पेड़
एक पूरा पेड़
पानी हो जाता है
झाँकते हुए पानी में
दो पेड़ दीखते हैं
एक पेड़ पानी का
एक
रोशनी का।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

रोशनी, पानी, पेड़ | अतुलवीर अरोड़ा

पानी में झाँकता है
एक पूरा पेड़
एक पूरा पेड़
पानी हो जाता है
झाँकते हुए पानी में
दो पेड़ दीखते हैं
एक पेड़ पानी का
एक
रोशनी का।