Pratidin Ek Kavita

सूर्य और सपने।चंपा वैद

सूर्य अस्त हो रहा है
पहली बार

इस मंज़िल पर
खड़ी वह देखती है

बादलों को
जो टकटकी लगा

देखते हैं
सूर्य के गोले को

यह गोला आग
लगा जाता है उसके अंदर

कह जाता है
कल फिर आऊँगा

पूछूँगा क्या सपने देखे?

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

सूर्य और सपने।चंपा वैद

सूर्य अस्त हो रहा है
पहली बार

इस मंज़िल पर
खड़ी वह देखती है

बादलों को
जो टकटकी लगा

देखते हैं
सूर्य के गोले को

यह गोला आग
लगा जाता है उसके अंदर

कह जाता है
कल फिर आऊँगा

पूछूँगा क्या सपने देखे?