Pratidin Ek Kavita

बाल- साहित्य के अग्रणी लेखक दामोदर अग्रवाल का जन्म 4 जनवरी 1932 को वाराणसी में हुआ था। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में आज़ादी की कहानी, चल मेरी नैया कागज वाली, प्राणों के स्वर शामिल हैं। 
  1. कोई ला के मुझे दे -  दामोदर अग्रवाल
कुछ रंग भरे फूल
कुछ खट्टे-मीठे फल,
थोड़ी बाँसुरी की धुन
थोड़ा जमुना का जल

कोई ला के मुझे दे!
एक सोना जड़ा दिन
एक रूपों भरी रात,
एक फूलों भरा गीत
एक गीतों भरी बात-
कोई ला के मुझे दे!

एक छाता छाँव का
एक धूप की घड़ी,
एक बादलों का कोट
एक दूब की छड़ी-
कोई ला के मुझे दे!

एक छुट्टी वाला दिन
एक अच्छी-सी किताब,
एक मीठा-सा सवाल
एक नन्हा-सा जवाब-
कोई ला के मुझे दे!

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What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

कोई ला के मुझे दे - दामोदर अग्रवाल

कुछ रंग भरे फूल
कुछ खट्टे-मीठे फल,
थोड़ी बाँसुरी की धुन
थोड़ा जमुना का जल

कोई ला के मुझे दे!
एक सोना जड़ा दिन
एक रूपों भरी रात,
एक फूलों भरा गीत
एक गीतों भरी बात-
कोई ला के मुझे दे!

एक छाता छाँव का
एक धूप की घड़ी,
एक बादलों का कोट
एक दूब की छड़ी-
कोई ला के मुझे दे!

एक छुट्टी वाला दिन
एक अच्छी-सी किताब,
एक मीठा-सा सवाल
एक नन्हा-सा जवाब-
कोई ला के मुझे दे!