Pratidin Ek Kavita

रीढ़। विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

कौन-सा अंग है
आदमी के शरीर में सबसे कीमती
प्रेममार्गियों ने कहा दिल
ज्ञानमार्गियों ने कहा दिमाग
कर्ममार्गियों ने कहा हाथ
पर रीढ़ न हो सीधी
तो कैसे बनेगा आदमी
कैसे खड़ा होगा वह
गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध
खड़े होते हैं बंदर और भालू भी
अपनी रीढ़ पर कभी-कभी
पर गीदड़ और गधे कभी नहीं
रीढ़ झुकी है तो हाथ बँधे हैं
हाथ बँधे हैं तो बँधी हैं आँखें
आँखें बँधी हैं तो बँधा है मस्तिष्क
मस्तिष्क बँधा है तो बँधी है आत्मा।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

रीढ़। विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

कौन-सा अंग है
आदमी के शरीर में सबसे कीमती
प्रेममार्गियों ने कहा दिल
ज्ञानमार्गियों ने कहा दिमाग
कर्ममार्गियों ने कहा हाथ
पर रीढ़ न हो सीधी
तो कैसे बनेगा आदमी
कैसे खड़ा होगा वह
गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध
खड़े होते हैं बंदर और भालू भी
अपनी रीढ़ पर कभी-कभी
पर गीदड़ और गधे कभी नहीं
रीढ़ झुकी है तो हाथ बँधे हैं
हाथ बँधे हैं तो बँधी हैं आँखें
आँखें बँधी हैं तो बँधा है मस्तिष्क
मस्तिष्क बँधा है तो बँधी है आत्मा।