Pratidin Ek Kavita

सपने । पाश
अनुवाद : चमनलाल

सपने
हर किसी को नहीं आते

बेजान बारूद के कणों में
सोई आग को सपने नहीं आते

बदी के लिए उठी हुई
हथेली के पसीने को सपने नहीं आते

शेल्फ़ों में पड़े
इतिहास-ग्रंथों को सपने नहीं आते

सपनों के लिए लाज़िमी है
झेलने वाले दिलों का होना

सपनों के लिए
नींद की नज़र होना लाज़िमी है

सपने इसलिए
हर किसी को नहीं आते


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

सपने । पाश
अनुवाद : चमनलाल

सपने
हर किसी को नहीं आते

बेजान बारूद के कणों में
सोई आग को सपने नहीं आते

बदी के लिए उठी हुई
हथेली के पसीने को सपने नहीं आते

शेल्फ़ों में पड़े
इतिहास-ग्रंथों को सपने नहीं आते

सपनों के लिए लाज़िमी है
झेलने वाले दिलों का होना

सपनों के लिए
नींद की नज़र होना लाज़िमी है

सपने इसलिए
हर किसी को नहीं आते