Pratidin Ek Kavita

इश्क़ में ‘रेफ़री’ नहीं होता! | गुलज़ार

इश्क़ में ‘रेफ़री’ नहीं होता

‘फ़ाउल’ होते हैं बेशुमार मगर
‘पेनल्टी कॉर्नर’ नहीं मिलता!

दोनों टीमें जुनूँ में दौड़ती, दौड़ाए रहती हैं
छीना-झपटी भी, धौल-धप्पा भी

बात बात पे ‘फ़्री किक’ भी मार लेते हैं
और दोनों ही ‘गोल’ करते हैं!

इश्क़ में जो भी हो वो जाईज़ है
इश्क़ में ‘रेफ़री’ नहीं होता!


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

इश्क़ में ‘रेफ़री’ नहीं होता! | गुलज़ार

इश्क़ में ‘रेफ़री’ नहीं होता

‘फ़ाउल’ होते हैं बेशुमार मगर
‘पेनल्टी कॉर्नर’ नहीं मिलता!

दोनों टीमें जुनूँ में दौड़ती, दौड़ाए रहती हैं
छीना-झपटी भी, धौल-धप्पा भी

बात बात पे ‘फ़्री किक’ भी मार लेते हैं
और दोनों ही ‘गोल’ करते हैं!

इश्क़ में जो भी हो वो जाईज़ है
इश्क़ में ‘रेफ़री’ नहीं होता!