Pratidin Ek Kavita

तुम | अदनान कफ़ील दरवेश

जब जुगनुओं से भर जाती थी
दुआरे रखी खाट

और अम्मा की सबसे लंबी कहानी भी
ख़त्म हो जाती थी

उस वक़्त मैं आकाश की तरफ़ देखता
और मुझे वह

ठीक जुगनुओं से भरी खाट लगता
कितना सुंदर था बचपन

जो झाड़ियों में चू कर
खो गया

मैं धीरे-धीरे बड़ा हुआ
और जवान भी

और तुम मुझे ऐसे मिले
जैसे बचपन की खोई गेंद

मैंने तुम्हें ध्यान से देखा
मुझे अम्मा की याद आई

और लंबी कहानियों की
और जुगनुओं से भरी खाट की

और मेरे पिछले सात जन्मों की
मैंने तुम्हें ध्यान से देखा

और संसार आईने-सा झिलमिलाया किया
उस दिन मुझे महसूस हुआ

तुमसे सुंदर
दरअसल इस धरती पर

कुछ भी नहीं था।


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

तुम | अदनान कफ़ील दरवेश

जब जुगनुओं से भर जाती थी
दुआरे रखी खाट

और अम्मा की सबसे लंबी कहानी भी
ख़त्म हो जाती थी

उस वक़्त मैं आकाश की तरफ़ देखता
और मुझे वह

ठीक जुगनुओं से भरी खाट लगता
कितना सुंदर था बचपन

जो झाड़ियों में चू कर
खो गया

मैं धीरे-धीरे बड़ा हुआ
और जवान भी

और तुम मुझे ऐसे मिले
जैसे बचपन की खोई गेंद

मैंने तुम्हें ध्यान से देखा
मुझे अम्मा की याद आई

और लंबी कहानियों की
और जुगनुओं से भरी खाट की

और मेरे पिछले सात जन्मों की
मैंने तुम्हें ध्यान से देखा

और संसार आईने-सा झिलमिलाया किया
उस दिन मुझे महसूस हुआ

तुमसे सुंदर
दरअसल इस धरती पर

कुछ भी नहीं था।