Pratidin Ek Kavita

सिर्फ़ प्यार करती हैं तितलियाँ । जयप्रकाश मानस

सिर्फ़ प्यार करती हैं तितलियाँ

हाँ तितलियाँ
फूलों से लता-वल्लरियों से

अचीन्हे पराए मंजरियों से
कहाँ परवाह

कि झट झर जाएँगे पर
नहीं झंझट

कभी जा पहुँचें नभ पर
तनिक न भय

कि जीवन दो दिना
बस यही सच

प्यार है अर्थ—शब्द जीना
धरा-विस्तार करती हैं तितलियाँ

सिर्फ़ प्यार करती हैं तितलियाँ।


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

सिर्फ़ प्यार करती हैं तितलियाँ । जयप्रकाश मानस

सिर्फ़ प्यार करती हैं तितलियाँ

हाँ तितलियाँ
फूलों से लता-वल्लरियों से

अचीन्हे पराए मंजरियों से
कहाँ परवाह

कि झट झर जाएँगे पर
नहीं झंझट

कभी जा पहुँचें नभ पर
तनिक न भय

कि जीवन दो दिना
बस यही सच

प्यार है अर्थ—शब्द जीना
धरा-विस्तार करती हैं तितलियाँ

सिर्फ़ प्यार करती हैं तितलियाँ।