Pratidin Ek Kavita

वापसी | अहमद फ़राज़

उस ने कहा
सुन
अहद निभाने की ख़ातिर मत आना

अहद निभाने वाले अक्सर
मजबूरी या महजूरी की थकन से लौटा करते हैं

तुम जाओ
और दरिया दरिया प्यास बुझाओ
जिन आँखों में डूबो
जिस दिल में उतरो
मेरी तलब आवाज़ न देगी
लेकिन जब मेरी चाहत
और मेरी ख़्वाहिश की लौ
इतनी तेज़ और इतनी
ऊँची हो जाए
जब दिल रो दे
तब लौट आना

अहद: प्रतिज्ञा/ वादा
महजूरी: विरह

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

वापसी | अहमद फ़राज़

उस ने कहा
सुन
अहद निभाने की ख़ातिर मत आना

अहद निभाने वाले अक्सर
मजबूरी या महजूरी की थकन से लौटा करते हैं

तुम जाओ
और दरिया दरिया प्यास बुझाओ
जिन आँखों में डूबो
जिस दिल में उतरो
मेरी तलब आवाज़ न देगी
लेकिन जब मेरी चाहत
और मेरी ख़्वाहिश की लौ
इतनी तेज़ और इतनी
ऊँची हो जाए
जब दिल रो दे
तब लौट आना

अहद: प्रतिज्ञा/ वादा
महजूरी: विरह