Pratidin Ek Kavita

कहीं बारिश हो चुकी है | ज़ीशान साहिल

मकान और लोग
बहुत ख़ुश और नए नज़र आ रहे हैं

रास्ते और दरख़्त
ख़ुद को धुला हुआ महसूस कर रहे हैं
दरख़्त: पेड़
फूल और परिंदे
तेज़ धूप में फैले हुए हैं

ख़्वाब और आवाज़ें
शायद पानी में डूबे हुए हैं

उदासी और ख़ुशी
ओस की तरह बिछी है

ऐसा लगता है
मेरे दिल से बाहर

या तुम्हारी आँखों के पास
कहीं बारिश हो चुकी है


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

कहीं बारिश हो चुकी है | ज़ीशान साहिल

मकान और लोग
बहुत ख़ुश और नए नज़र आ रहे हैं

रास्ते और दरख़्त
ख़ुद को धुला हुआ महसूस कर रहे हैं
दरख़्त: पेड़
फूल और परिंदे
तेज़ धूप में फैले हुए हैं

ख़्वाब और आवाज़ें
शायद पानी में डूबे हुए हैं

उदासी और ख़ुशी
ओस की तरह बिछी है

ऐसा लगता है
मेरे दिल से बाहर

या तुम्हारी आँखों के पास
कहीं बारिश हो चुकी है