Pratidin Ek Kavita

भेजना | त्रिभुवन

लौटते पत्र के साथ
कुछ बादल भेजना

समुद्र के कुछ पेड़
पत्तियों के बीच चहचहाते कुछ पक्षी

और पानी की कुछ लहरें भेजना
अपनी सुंदर आँखों के अक्स भेजना

भेजना चेहरे की लालिमा के कुछ लैंडस्केप
और रात भर नशा करके बैठी सुबह की कुछ छवियाँ भेजना

हाँ, एक खुली खिड़की भेजना
एक मदमाती पतली अकेली गली का वह कोना भेजना

जहाँ मैं तुमसे मिल सकूँ
और अपनी उँगलियों की छुअन भेजना

जिसे अपनी चाहत की दीवारों में गाड़कर
अपने भरोसे की गठरी टाँग दूँ!

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

भेजना | त्रिभुवन

लौटते पत्र के साथ
कुछ बादल भेजना

समुद्र के कुछ पेड़
पत्तियों के बीच चहचहाते कुछ पक्षी

और पानी की कुछ लहरें भेजना
अपनी सुंदर आँखों के अक्स भेजना

भेजना चेहरे की लालिमा के कुछ लैंडस्केप
और रात भर नशा करके बैठी सुबह की कुछ छवियाँ भेजना

हाँ, एक खुली खिड़की भेजना
एक मदमाती पतली अकेली गली का वह कोना भेजना

जहाँ मैं तुमसे मिल सकूँ
और अपनी उँगलियों की छुअन भेजना

जिसे अपनी चाहत की दीवारों में गाड़कर
अपने भरोसे की गठरी टाँग दूँ!