Pratidin Ek Kavita

पुराना घर। गोबिंद प्रसाद

पुराना घर
इतना पुराना

कि कभी पुराना नहीं होता
कविता की उस किताब की तरह

पंक्तियों के बीच
ठहरे हुए किसी अनबीते की तरह

मन में बसा रहता है यह पुराना घर
पुराना घर

आज भी कितना नया है
इन आँखों में

और आँखें ख़ुद कितनी नई हैं
घर के इस पुरानेपन को देखने के लिए

इसे कौन जानता है
सिवा पुराने घर के...।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

पुराना घर। गोबिंद प्रसाद

पुराना घर
इतना पुराना

कि कभी पुराना नहीं होता
कविता की उस किताब की तरह

पंक्तियों के बीच
ठहरे हुए किसी अनबीते की तरह

मन में बसा रहता है यह पुराना घर
पुराना घर

आज भी कितना नया है
इन आँखों में

और आँखें ख़ुद कितनी नई हैं
घर के इस पुरानेपन को देखने के लिए

इसे कौन जानता है
सिवा पुराने घर के...।